‘मेले का ऊँट’ का प्रतिपाद्य

balmukund gupt nibandh

बालमुकुन्द गुप्त के लेख ‘मेले का ऊँट’ का प्रतिपाद्य

‘मेले का ऊँट’ का प्रतिपाद्य -> बालमुकुन्द गुप्त के प्रस्तुत निबंध में व्यंग्य एवं हास्य का पुट पाया जाता है। उन्होंने अपने समय के वातावरण तथा शासकों और प्रजा के बीच जिस तरह के संबंध रहे हैं उनका परोक्ष रूप में चित्रण किया है। वे पहचान और समझ-बूझ के बल पर अपने विचारों को उत्तेज़क रूप में व्यक्त करते हैं। वे स्वेदश तथा हिन्दी भाषा के प्रति सजग एवं जागरूक थे। उसी के अनुरूप उन्होंने प्रस्तुत निबंध में अपनी विचारावली को महत्त्व दिया है। उनके लिए किसी भी राजनीतिक व्यवस्था में सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न शासक और प्रजा के संबंधों का है। उनका समय नवजागरण का समय था।

उसमें लोगों में जागृति एवं देश-प्रेम की भावना को उत्पन्न करना था। वे भारतेन्दु मंडल के साथ लेखकों की तरह ही देशानुराग एवं शासन के प्रति विद्रोह-भावना लोगों के मन में पैदा कर रहे थे। गुप्त जी ने अंग्रेजों की ही ख़बर नहीं ली भारतवासियों की चुप्पी और सहनशीलता को भी अपने व्यंग्य का केन्द्र बनाया है। उनकी विशिष्ट कथन-भंगिमा ही उनकी असली ताकत है। उनके सारे आक्रोश का केन्द्र लॉर्ड कर्जन ही हैं।

मेले का ऊँट का प्रतिपाद्य mele ka oont ka pratipaady

प्रस्तुत निबंध में राजनीतिक पराधीनता से मुक्त होने और अपने गौरवपूर्ण इतिहास को पहचानने, उनसे जुड़ने और देश का हित चाहने वालों को स्वाभिमान रक्षा का संदेश दिया है। यह एक सामाजिक निंबध भी कहा जा सकता है, क्योंकि राजनीतिक पराधीनता स्वीकार करने वाले, हथियार न उठाने वाले और अंग्रेजों द्वारा राय बहादुर किताब पाकर स्वयं को सम्मानित समझने वाले समझौता-परस्त मनुष्य राष्ट्र के लिए एक अभिक्षाप हैं, कलंक हैं। सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टि से गुप्त जी की नाराजगी का केन्द्र उस समय कलकत्ते में बसने बोला वह मारवाड़ी समाज भी है, जो अंग्रेजी सभ्यता की चकाचौंध में अपने अतीत और अपनी संस्कृति को मूल रहा है।


इस निबंध में ‘ऊँट’ के माध्यम से संस्कृति से विहीन भारतीयों का पुनः लौटने का आहवान गुप्त जी का प्रमुख लक्ष्य है। एक स्थान पर वह पथ-भ्रष्ट भारतीयों को चेतावनी-स्वरूप लिखते हैं। “तुम्हारी भक्ति घट जाने पर भी मेरा वात्सल्य नहीं घटता है। घटे भी कैसे मेरा तुम्हारा जीवन एक ही रस्सी से बँधा हुआ था।” यह गुप्त जी के लेखन का एक भिन्न आस्वाद है। इतिहास-दृष्टि, वैचारिक पक्ष और अमिट राष्ट्र-प्रेम के फलस्वरूप यह निबंध अपने कथ्य और संप्रेषणीयता के कारण फिर स्मरणीय बन गया है।

बालमुकुन्द गुप्त baalamukund gupt

गुप्त जी कलकत्ते के अख़बार ‘भारत मित्र’ के सम्पादक को पत्र लिखते हैं कि पिछले सप्ताह जब वे ‘भारत मित्र’ में अपना लेख दूँढ रहे थे, उसी समय उनकी दृष्टि ‘मोहन मेले’ से सम्बद्ध लेख पर पड़ी। उस लेख को पढ़कर उन्हें संपादक महोदय की बुद्धि पर अफसोस हुआ और उन्होंने सम्पादकीय दायित्व समझाते हुए उसे एक पत्र लिख भेजा था। संपादक के दायित्व की दृष्टि से भूखे, गिद्ध का उदाहरण बहुत ही यटीक बन पड़ा है। कलकत्ते के ‘मोहन मेले’ में एक ओर ऊँट भी बैठा है, जिसे सब, यहाँ तक कि मारवाड़ी भी उपेक्षा और हँसी उड़ाने के भाव से देख रहे हैं।

ऐसे में भंग की तंरग में लेखक को लगता है कि ऊँट मारवाड़ियों को बता रहा है कि उसने उनके पूर्वजों की कितनी सेवा की है और वे भी उसे कितना प्यार करतें थे। ऊँट कहता है कि उसके मुँह से निकलने वाली ध्वनि जो आजकल मारवाड़ियों को बिल्कुल नहीं भाती, उस के पूर्वजों को बहुत मीठी एवं मधुर लगती थी। आधुनिक मारवाड़ियों की अपनी पसन्द की लड़की से विवाह करने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य किया गया है। मारवाड़ियों के पूर्वजों का ऊँट में लगाव यहाँ सहज स्पष्ट है। ऊँट जैसे उनके परिवार का अंग ही होता था।

मेले का ऊँट प्रतिपाद्य mele ka oont pratipaady

लेखक कहता है कि कल के गरीब सदा गरीब रहेंगे, ऐसा कोई नियम नहीं है। वह ऊँट को चेतावनी देता है कि किसी की पुरानी बातों को खोलकर कहने से आजकल के कानून से हदतक इज्ज़त होती है। लेखक ऊँट को समझाते हुए कहता है कि अब मारवाड़ियों ने कलकत्तें में अपना औपचारिक संगठन बना लिया है। उन्हें अपनी बकवास सुनना पसन्द नहीं है। इसमें मारवाड़ियों की एसोसिएशनों पर व्यंग्य किया है। आजकल ऐसोसिएशनें व्यर्थ के कामों पर अधिक ध्यान देती हैं। यहाँ इसी का संकेत दिया गया है। कलकत्ता के मारवाड़ी पर्याप्त धनाढ्य हो गए हैं। ऊँट की उपयोगिता आज संग्रहालय के पक्षु जैसी होती जा रही है। इसमें व्यंग्य का पुट है। ‘ब्लैक होल’ खोलकर लॉर्ड ‘कर्ज़न पर कटु-व्यंग्य किया है। आजकल सेवा और सम्मान, सेवक और गुणी का नहीं, चापलूसों का होता है। यह भाव भी प्रस्तुत निबंध में मुखरित होता है।

also read -> मेले का ऊँट निबन्ध का सार

Visual Aids
Knowledge
Sonu Mathur

What are Visual Aids?

What are Visual Aids? Visual aids are visual materials, such as pictures, charts, and diagrams, that help people understand and remember information shared in an

Read More »
Manipur news viral video
News
Sonu Mathur

Manipur news viral video

Manipur News Case of Two Women Being Stripped and Paraded in Manipur Manipur news viral video: A disturbing incident has come to light in Manipur, where

Read More »
Top 5 ai tools for programmer
News
Sonu Mathur

Top 5 AI tools for developer

Introduction: Top 5 ai tools for programmer : Artificial Intelligence (AI) has revolutionized the way programmers work by providing intelligent assistance and automating repetitive tasksArtificial

Read More »